14 अक्टूबर 2020 - 10:09
अमरीका ईरान की ताक़त से इतना क्यों डरता है? अमरीकी पत्रिका का सवाल... सच वह जो दुश्मन भी माने... रोचक जायज़ा

द अमरीकन कन्ज़रवेटिव पत्रिका टीएसी ने लिखा है कि माइक पोम्पियो ने इस हफ्ते न्यूज़मिक्स से एक बात चीत की है और उसमें उन्होंने अपने पद के दौरान एक बेहद शर्मनाक और हास्यास्पद बयान दिया है।

   पत्रिका ने लिखा है कि माइक पोम्पियो ने कहा कि “ सब से बड़ा काम जो राष्ट्रपति ट्रम्प ने किया है वह यह था कि उन्होंने ईरान के साथ परमाणु समझौते को बुरा समझौता कहते हुए उससे निकलने का फैसला किया, यह समझौता अमरीका के लिए बुरा और एक खतरा था। उसके बाद से हमने मध्य पूर्व में स्थिरता के लिए बिल्कुल अलग रणनीति अपनायी। हम इस्लामी गणतंत्र ईरान को शांति के लिए सब से बड़ा खतरा बल्कि सच बात तो यह है कि हम ईरान को अपने विशाल देश अमरीका के लिए सब से बड़ा खतरा समझते हैं। “  

     इस अमरीकी पत्रिका ने लिखा है कि पोम्पियो को सब से अधिक इस बात का पता है कि ईरान अमरीका में अमरीकियों के लिए कभी खतरा नहीं रहा है इस आधार पर यह बिल्कुल गलत और निराधार है कि ईरान अमरीकियो के लिए अमरीका में सब से बड़ा खतरा है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान को सब से बड़ा खतरा बताने से अमरीका के लिए वास्तविक खतरों की अनदेखी भी की जा रही है। अमरीकी विदेशमंत्री इस्राईल के साथ संबंध बनाने  और ईरान के सामने खड़े होने के लिए विभिन्न देशों को तैयार करने के लिए लगातार विदेश दौरे पर हैं और अमरीकी, कोरोना में हर रोज़ मर रहे हैं क्योंकि सरकार ने इस बीमारी पर नियंत्रण में लापरवाही की है।

     इस अमरीकी पत्रिका ने लिखा है कि हमारे नेता अन्य देशों की ओर से खतरों को जो हमें कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकते खूब बढ़ा चढ़ा कर पेश करते हैं लेकिन वास्तविक खतरों को खत्म करने के लिए कुछ नहीं करते जिनसे हर रोज़ हज़ारों अमरीकियों की जान जाती है। एसी हालत में जब अमरीका में कोरोना से मरने वालों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है अमरीकी सरकार दुनिया के दूसरे कोने पर स्थित एक देश पर प्रतिबंध कड़े करने में व्यस्त है।

   हमारे वरिष्ठ अधिकारी अमरीकी की सुरक्षा के लिए विश्व समुदाय के सहयोग की कोशिश के बजाए एक एसी देश को अपमानित करने पर तुले हैं जिससे हम पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। आज अमरीका का विदेश नीतियां राष्ट्रीय हितों से बहुत दूर हो चुकी हैं एसा पहले कभी नहीं हुआ है।

     एक सऊदी पायलट द्वारा की गयी फायरिंग में बहुत से अमरीकी मारे गये हैं जबकि आज तक अमरीका में एक अमरीका भी किसी ईरानी नागरिक के हमले में नहीं मारा गया है। ईरान न केवल यह कि अमरीका में हमारे लिए खतरा नहीं है बल्कि वह हमारे राष्ट्रीय हितों के लिए भी खतरा नहीं है।

द अमरीकन कन्ज़रवेटिव पत्रिका टीएसी ने लिखा है कि कन्ज़रवेटिव बेहद बेशर्मी से अमरीकियों को ईरान की ताक़त से डरा रहे हैं और ईरान के बेगुनाह नागरिकों को नुक़सान पहुंचा रहे हैं। ईरान पर प्रतिबंधों की वजह से दसियों लाख लोग दुख व समस्या में ग्रस्त हैं और यह काम हमारी सरकार ने किया है।

     हमारी सरकार अस्ल में अमरीकी जनता को डराना चाहती है इस लिए विदेशी खतरे की बात कर रही है। हमारी सरकार विदेशी खतरों को बढ़ा चढ़ा कर पेश कर रही है ताकि भारी सैन्य बजट का रास्ता खुला रहे। झूठ बोलने की यह नीति अस्ल में किसी देश पर हमले के लिए भी इस्तेमाल की जाती है और अब हम यह सहन नहीं कर सकते।

हम अगर अमरीका और ईरान की शक्ति के मध्य पाये जाने वाले अंतर पर ध्यान दें तो हमें इस बात पर बड़ी हैरत होती है कि ईरानी, हमारे लिए खतरा बन सकते हैं। अमरीका ईरान के खिलाफ भयानक आर्थिक युद्ध कर रहा है और इसका सब से अधिक नुक़सान इस देश की जनता को हो रहा है। यह आर्थिक युद्ध उस समझौते से निकलने की वजह से है जिसे ईरान ने कई बरसों तक सदभावना के साथ लागू किया और आज भी अमरीका द्वारा उससे निकलने पर मजबूर करने की कोशिशों के बावजूद ईरान समझौते का पालन कर रहा है।

     पोम्पियो ने अपने बयान के एक अन्य भाग में कहा कि ट्रम्प सरका ने मध्य पूर्व के बारे में अलग रणनीति अपनायी है। यह बात सही है लेकिन उस तरह से नहीं जैसा वह कहना चाह रहे थे बल्कि ट्रम्प सरका ने मध्य पूर्व में भडकाऊ और अस्थिरता पैदा करने वाले काम किये हैं और उनकी यह अलग रणनीति हो सकता है कि अमरीका को एक अनावश्यक युद्ध में घसीट ले।